पेंशन सत्याग्रह आखिर क्यों??
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*#मेरी कलम से*
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*कई लोगों ने पूछा कि दिल्ली ##पेंशनसत्याग्रह करने जा रही है,आखिर इसके मूल में क्या है? क्या सत्याग्रह #केजरीवाल सरकार के खिलाफ होगा या #उपराज्यपाल के खिलाफ?? आखिर सत्याग्रह की #प्रासंगिकता क्या है?आखिर इसके पीछे की #रणनीति क्या है*?
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*सबसे पहले आप को यह समझना होगा कि दिल्ली बाकी 8राज्यों की तरह #केंद्रशाशित होने के कारण यहां के सभी कर्मचारियों के आर्थिक मसलों पर केंद्र ही फैसला ले सकता है। दिल्ली के सभी कर्मचारी वस्तुत: केंद्र के अधीन होते हैं उनकी सैलरी,भत्ते, पेंशन सब केंद्र से आते हैं,और वही अन्तिम नियामक होती है। इसलिए #केजरीवालजी के द्वारा पुरानी पेंशन बहाली के #बिल को पारित करके केंद्र पर न केवल दबाव बनाने की कोशिश की गयी बल्कि प्रत्येक मीडिया ने इस कदम को अपनी प्रमुख खबर बनाकर हमारे आन्दोलन को पूरे देश में एक पहचान भी दिलाई, जबकि 30 अप्रैल को इसी मीडिया ने हमारे प्रोटेस्ट को पूर्णत: नजर अंदाज किया था*(एनडी टीवी को छोडकर)।
*बेशक #उपराज्यपाल ने उस बिल को राष्ट्रपति की तरह जेब में रखकर खत्म कर दिया हो*।
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*अब बात आती है एक #समयांतराल की,आखिर कर्मचारियों के आन्दोलन में कितना समयान्तराल वाजिब हो सकता है,अमूमन सरकारें और जनता तो कर्मचारियों को बेईमान ही सिद्ध करती रह्ती हैं, हमारे प्रति आमजनता में भी कोई खास संवेदना भी नही रहती।इसका फायदा उठाकर कर्मचारी आन्दोलन अक्सर कुचले जाते रहे हैं। पिछला बडा आन्दोलन देखा जाये तो 26नवम्बर 2018 को हुआ था,लगभग एक साल बीतने को है,अब अक्टूबर में हरियाणा,महाराष्ट्र,झारखंड के चुनाव प्रस्तावित हैं,फरवरी में स्वयं दिल्ली के चुनाव और मार्च में बोर्ड एग्ज़ाम के बाद अप्रैल में यूपी के विधानपरिषदों के चुनाव तक दिल्ली में प्रोटेस्ट सम्भव नही दिखता*!
*मई जून जुलाई तक मौसम भी एक बाधक है, #अगस्त2020 से पहले शायद ही कोई बड़ा राष्ट्रीय प्रदर्शन सम्भव हो सके*।
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*इसके अलावा पेंशन, राज्य सरकारों के दायरों में होने से सभी राज्य अपने अपने यहां पूरी शक्ति के साथ आज प्रदर्शन में व्यस्त हैं, होना भी चाहिये,उनका हक उनके राज्य से ही मिलेगा। अब इतना समयान्तराल क्या हमारे लिये हितकर होगा! क्या वे राज्य जो आज अपनी सरकारों/विपक्ष पर दबाव बना पाने में सक्षम हो रहे हैं, हम केन्द्रीय कर्मचारियों के साथ प्रोटेस्ट करने दिल्ली आयेंगे*????🤔🤔🤔
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*यह एक बहुत ही सम्वेदनशील मुद्दा है, आखिर हम #केन्द्रीय कर्मचारी हैं,हमारी समस्या केवल #केंद्र/दिल्ली से हल होनी है। इस गैप को भरने के लिये,इस लड़ाई को जिंदा रखने के लिये हम #9नवम्बर से ##पेंशनसत्याग्रह कर रहे हैं*।
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*यदि आपको लगे कि यह लड़ाई आपकी भी है और आप स्वयं केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं,तो #बैनर, #युनियन के दायरे से निकलकर इस ##सत्याग्रह को सफल बनाने हेतु अपनी भूमिका सुनिश्चित कीजिये*!🤗🤗🤗🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
*याद रखियेगा वक्त आपको बुला रहा है,इतिहास रचने के लिये*।।
आपका
*मन्जीत सिंह पटेल*
*NMOPS*
सराहनीय
ReplyDeleteबहुत सार्थक व दमदार तर्कों के साथ आप इस पेंशन सत्याग्रह की पहल करने जा रहे हैं मंजीत भाई। निश्चित रूप से बिना सक्रियता का यह मुद्दा बेदम हो जाएगा और बिलकुल अंतिम समय पर किये गए किसी भी प्रयास में मात्र हमें हमेशा की तरह निराशा के सिवाय कुछ नही मिलेगा। सराहनीय व अनुकरणीय कदम।
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